जैन धर्म में आत्मा और शरीर: अपने वास्तविक स्वरूप को समझें
5 मिनट पढ़ें
जिनसेतु AI ज्ञान प्रणाली द्वारा सत्यापित
जैन आध्यात्मिक सत्यों पर आधारित
जैन दर्शन में सबसे मूलभूत अनुभूति आत्मा (जीव) और शरीर (अजीव) के बीच का पूर्ण अंतर है। इस भेद का अज्ञान ही दुनिया के सभी दुखों का मूल कारण है।
आत्मा की प्रकृति (जीव)
आत्मा शाश्वत, निराकार और मूल रूप से चेतन है। इसका वास्तविक स्वरूप अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन और अनंत आनंद है। आत्मा कभी नहीं मरती; वह केवल शरीर बदलती है।
महान भ्रम (मिथ्यात्व)
'मैं इस शरीर से अलग एक शुद्ध आत्मा हूँ' यह एहसास मुक्ति (सम्यक् दर्शन) की दिशा में पहला कदम है।
Read Prarthna
Interactive PreviewInteractive preview loading...
Frequently Asked Questions
मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है?
आत्मा भौतिक शरीर को छोड़ देती है और अपने कर्मों के अनुसार नया जन्म लेती है, जब तक कि वह मोक्ष प्राप्त न कर ले।
Now Explore Further
Still have a question?
JinSetu AI has read the ancient scriptures. Ask anything about Jain Dharma and get an instant, verified answer.