JinSetu Logo
JinSetu
AI से पूछें
धर्मग्रंथ
तीर्थंकर
पाठशाला
साधना
तीर्थ मानचित्र
बच्चों का मोड
  1. Home
  2. ›
  3. जैन दर्शन
  4. ›
  5. जैन धर्म में कर्म क्या है? प्रकार, प्रभाव और मुक्ति

जैन धर्म में कर्म क्या है? प्रकार, प्रभाव और मुक्ति

6 मिनट पढ़ें
जिनसेतु AI ज्ञान प्रणाली द्वारा सत्यापित
तत्वार्थ सूत्र अध्याय 8 पर आधारित

जैन धर्म में, कर्म केवल कार्य-कारण का नियम नहीं है; यह सूक्ष्म भौतिक द्रव्य (पुद्गल) है जो ब्रह्मांड में तैरता है और हमारे कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) के कारण आत्मा से चिपक जाता है।

कर्म के 8 मुख्य प्रकार

  • ज्ञानावरणीय: ज्ञान को रोकने वाला।
  • दर्शनावरणीय: दर्शन को रोकने वाला।
  • मोहनीय: मोह पैदा करने वाला।
  • अंतराय: विघ्न पैदा करने वाला।
  • वेदनीय: सुख-दुख का अनुभव कराने वाला।
  • नाम: शरीर का निर्माण करने वाला।
  • गोत्र: कुल का निर्धारण करने वाला।
  • आयु: उम्र का निर्धारण करने वाला।

Try Samayik Now

Interactive Preview
48:00

Frequently Asked Questions

क्या सभी कर्म बुरे होते हैं?

जैन धर्म में पुण्य भी एक बंधन है, हालांकि यह पाप से बेहतर है। अंतिम लक्ष्य सभी कर्मों से मुक्ति है।

Now Explore Further

साधना शुरू करें

Still have a question?

JinSetu AI has read the ancient scriptures. Ask anything about Jain Dharma and get an instant, verified answer.

JinSetu Logo
JinSetuबुद्धि • भक्ति

उत्पाद

  • AI से पूछें
  • तीर्थ मानचित्र

शिक्षण

  • धर्मग्रंथ
  • तीर्थंकर
  • बच्चों का मोड
  • पाठशाला

अन्वेषण

  • साधना
  • हमारे बारे में
  • साझा संप्रदाय
© 2026 JinSetu • प्रेमपूर्वक निर्मित भक्तों द्वारा

अपना ज्ञान साझा करें

विश्व के पहले जैन AI को बेहतर बनाने में हमारी सहायता करें

अनुभव