जैन धर्म में अहिंसा क्या है? अर्थ, सिद्धांत और अभ्यास
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जैन आगमों और भगवान महावीर के उपदेशों पर आधारित
'अहिंसा परमो धर्मः' - अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म है। जैन धर्म में अहिंसा का मतलब सिर्फ शारीरिक चोट पहुंचाने से बचना नहीं है, बल्कि उन नकारात्मक विचारों और वाणी से भी बचना है जो किसी भी जीवित प्राणी को दुख पहुंचा सकते हैं।
अहिंसा के तीन स्तर
जैन धर्म क्रिया के माध्यम के आधार पर अहिंसा के अभ्यास को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:
- मन: क्रोध, लोभ या नुकसान के विचारों से बचना।
- वचन: कठोर शब्द, झूठ या निंदा से बचना।
- काया: शारीरिक हिंसा या किसी भी जीव की हत्या से बचना।
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Frequently Asked Questions
क्या अहिंसा का मतलब सिर्फ जानवरों को न मारना है?
नहीं, इसमें पौधों, सूक्ष्मजीवों और अहंकार जैसी नकारात्मक भावनाओं से बचकर अपनी आत्मा के प्रति अहिंसा भी शामिल है।
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