अपरिग्रह क्या है? जैन धर्म का अनासक्ति का सिद्धांत
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भगवान महावीर के उपदेशों पर आधारित
अपरिग्रह जैन धर्म के पांच महाव्रतों में से एक है। इसका अर्थ है अनासक्ति या संग्रह न करना। यह सिखाता है कि हम भौतिक वस्तुओं से जितना अधिक जुड़ते हैं, उतना ही अधिक दुख आमंत्रित करते हैं।
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Frequently Asked Questions
आम लोग अपरिग्रह का पालन कैसे कर सकते हैं?
आम लोग अपनी संपत्ति और इच्छाओं पर सीमा (परिमाण) निर्धारित करके इसका पालन कर सकते हैं।
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