जैन पच्चक्खाण: अर्थ, महत्व और सूची
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जैन साधना विधियों पर आधारित
पच्चक्खाण (प्रत्याख्यान) का अर्थ है एक निश्चित अवधि के लिए कुछ खाद्य पदार्थों, गतिविधियों या भौतिक आसक्तियों से दूर रहने का औपचारिक संकल्प। यह इच्छाशक्ति बढ़ाने और नए कर्मों के प्रवाह को रोकने (संवर) के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है।
सामान्य पच्चक्खाण
- नवकारसी: सूर्योदय के 48 मिनट बाद ही पानी या भोजन लेना।
- पोरसी: सूर्योदय के 3 घंटे तक कुछ भी न खाना।
- चौविहार: सूर्यास्त के बाद सभी भोजन और पानी का त्याग करना।
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Frequently Asked Questions
पच्चक्खाण लेना क्यों आवश्यक है?
क्योंकि संकल्प के बिना त्याग तपस्या नहीं माना जाता है।
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